Delhi CM Arvind Kejriwal ने प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी फ़ीस पर लगई फटकार

दिल्ली सरकार पर कोरोना केस के लगातार बढने और उन मरीजों को ठीक समय पर इलाज न मिलने के भी आरोप लग रहे है | दिल्ली में मौजूद प्राइवेट अस्पतालों पर भी अपनी मनमानी फ़ीस लेने के भी आरोप लग रहे है | दिल्ली में कुछ प्राइवेट अस्पतालों में बेड्स की भी काला बजारी चल रही है | इसी के चलते दिल्ली सरकार फाई एक बार सवालो के घेरे में आ गयी है | इस पर CM केजरीवाल का क्या कहना है |

CM केजरीवाल ने फिलाल में ही की एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा की “एक न्यूज़ चैनल ने लाइव टीवी शो पर एंकर ने एक अस्पताल में कॉल किया था की उनके घर में एक कोरोना मरीज है और उनकों बेड की जरुरत है तब अस्पताल की तरफ से जबाब आता है की उनके पास कोई खाली बेड नहीं है तब मरीज के बेड के लिए ज्यादा मोंग की तब प्राइवेट अस्पताल वाले बेड देने के लिए तैयार हो गए | लेकिन इस बेड के बदले 8 लाख रुपय की मांग की |”

दिल्ली सरकार पर उन्ही के द्वारा किये 2 जून को app लांच में दिल्ली में सभी अस्पतालों मे कितने खली बेड्स है इसकी जानकारी मिलती रहेगी | इस बात पर भी CM केजरीवाल का कहना है की app पर जितना भी डाटा अपलोड होता है | वह सभी डाटा खुद अस्पतालों के द्वारा ही होता है | जब उन अस्पतालों पर कॉल कर के बेड्स के बारे में पूछा जाता है तो वह मना कर देते है |

इन्ही सभी फेक डाटा अपलोड करने या गलत जानकारी देने के रोकने के लिए केजरीवाल का कहना है की अब सभी प्राइवेट अस्पतालों में एक सरकारी कर्मचारी बैठेंगे | जो यह सुनिचित करेंगे की सही जानकारी इस app या दिल्ली सरकार को दी जा रही है |

दिल्ली में कोरोना टेस्टिंग को लेकर भी उनका जबाब था की दिल्ली में प्रतिदिन 5300 टेस्टिंग हो रही है | जो प्राइवेट और सरकारी लैब द्वारा की जा रही है | उन्होंने यह भी कहा की दिल्ली में कुल 42 टेस्टिंग लैब है जो कोरोना टेस्ट करती है इनमें से 6 एसी लैब है जो टेस्टिंग में आना कानी कर रही है |

CM केजरीवाल ने यह भी बोला की कभी ऐसा भी मरीज आ जाता है की जो सांस लेने मे दिक्कत आ रही होती है और उस मरीज को तुरंत वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है तब हॉस्पिटल वाले उस मरीज को लेने से मना कर देते है की यह मरीज सस्पेक्ट है | केजरीवाल ने कहा है की एसी घटना को रोकने के लिए law आर्डर पास किया है | जिसमें मरीज को कोरोना मरीज मानकर उसका इलाज किया जाये | बाद में उसकी टेस्टिंग की जाये | अगर वह मरीज पॉजिटिव आया तब उसका इलाज कोरोना इलाज की तरह होगा, अगर रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो उस मरीज को सामान्य वार्ड में एडमिट कर लिया जाये | 

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