Kundali Bhagya 14 October 2020 Written Update:पृथ्वी ने प्रीता को थप्पड़ मारा!

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Kundali Bhagya 14 October 2020 Written Update

कुंडली भाग्य के पिछले नाटक में, राखी महेश से बात करने के लिए जाती  है और कहती है की मैं जितना संभाल सकती थी उतना संभाल चुकी हूँ अब मुझे आपकी जरुरत है| तभी कमरे में शर्लिन और माहिरा आ जाती है और सरला के बारे में बुरा भला कहने लगती है की वो संस्कार की बात करती है लेकिन उनमें संस्कार नाम की चीज़ नहीं है| तभी राखी दोनों को सरला के खिलाफ ना बोलने को कहती है| वहीँ ऋषभ भी अकेले में सरला को समझाता है की आप की परेशानी समझ सकता हूँ| वहीँ पवन प्रथ्वी को होश में लाने के लिए उस पानी डालता है जैसे ही प्रथ्वी होश में आता है और प्रीता को बंधा देखता है तब एक दम हैरान रह जाता है और प्रीता को खोलने के लिए कहता है|

Kundali Bhagya 14 October 2020 Full Episode

कुंडली भाग्य के आज के नाटक में, प्रथ्वी चाहता है की वो प्रीता से शादी कर करण को हराना है| पवन प्रथ्वी को कहता है की प्रीता खुद शादी नहीं करना चाहती है इसलिए उनके हाथ पैर बांधे थे| प्रथ्वी कहता है की प्रीता जैसी दिखती है वैसी नहीं है दरसल वो खुद नहीं जानती है की मुझसे प्यार करती है| आगे कहता है जैसे ही मैं उनको हैंडल करूँगा| तब वो मुझे खुशी-खुशी अपना लेंगे| प्रथ्वी, पवन से कहता है की आज के बाद प्रीता जी पर हाथ पैर मत चलाना, लेकिन सृष्टि के साथ जो करना है वो कर|

वहीँ गब्बर सेल्फी ले रहा होता है तब उनको जानकी के कमरे से कुछ गिरने की आवाज आती है जिससे सुनकर वो गुंडा कमरे की तरफ जाता है और देखता है की बुडिया गायब| लेकिन दूसरे गुंडे बंधे हुए है| जिसके बाद जानकी भागने की कोशिश करती है लेकिन पवन और प्रथ्वी वहां आ जाते है और उनको गुंडा बताता है की बुडिया भाग गयी है| जिसको सुनकर प्रथ्वी हैरान हो जाता है| प्रथ्वी, पवन को बताता है कि वो बुडिया शातिर और चालबाज किस्म की है| आगे बताता है की मेरे साथ जितने भी फसाद हुए है उनकी जिम्मेदार वो बुडिया है| आगे और बताता है की उसको ना सबकुछ याद है और ना सबकुछ भूली| आगे बताता है की जब भी मैं उसको देखता हूँ लगता है की उसको सबकुछ याद आ गया|

वहीँ जानकी ये सब छिपकर सुन रही होती है और सोचती है की ऐसा क्या है जो मुझे याद आ जायेगा| तो बहुत बड़ी परेशानी आ सकती है| प्रथ्वी गब्बर को कह्र्ता है की तुजे वो बुडिया कहीं भी दिखे तो गोली चला देना| 

पवन प्रथ्वी से कहता है की भाई जो आप चाहते थे मैं प्रीता को उठा लाया| प्रथ्वी पवन से कहता है की मैं जानता हूँ तूने ये सब मेरे लिए किया है लेकिन वो जानकी बुडिया नहीं मिली तो मेरे लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी| प्रथ्वी, पवन को बताता है की पता नहीं मुझे क्या हो जाता है की जब भी मैं प्रीता को देखता हूँ तो मेरा गुस्सा ठंडा हो जाता है| प्रथ्वी पवन से कहता है की अब मैं बाहर जाऊंगा और प्रीता की मुहँ की पट्टी औरर रस्सी खोल दूंगा| लेकिन पवन प्रथ्वी को रोकने की कोशिश करता है और कहता है की पहले उस बुडिया को तो खोज लेते है|

प्रथ्वी बाहर आ जाता है और दोनों लोगों की रस्सी खुलवा देता है| प्रथ्वी अपने भाई की तरफ से भाई मांगता है और कहता है की वो पागल है| प्रथ्वी, प्रीता से अकेले में बात करने के लिए हाथ पकड़कर ले जाने लगता है लेकिन सृष्टि प्रीता का दूसरा हाथ पकड़कर रोक लेती है| यह सब जानकी चुपके से देख रही होती है| जानकी पवन पर गुस्सा होती है की उसने सृष्टि पर बंदूक तानी होती है| और पवन पर फूलदान फैंककर मारती है| और जानकी जैसे ही पवन पर चाकू से वार करने वाली होती है प्रथ्वी लकड़ी के पटले से जानकी पर हमला करता है और जानकी बेहोश होते-होते पिछली यादे याद आने लगती है|

प्रथ्वी बाद में प्रीता को कमरे में बात करने के लिए ले जाता है की और कहता है की मैं बर्दाश नहीं कर सकता को मेरे भाई पर हाथ उठाये| प्रथ्वी कहता है की मैंने जानकी आंटी को नहीं रोका होता तो आज वो भगवान को प्यारा हो जाता| प्रीता, प्रथ्वी से कहती है की कैसा भाई है आपका मुझे और मेरे परिवार को उठा लाया| प्रीता कहती है मैंने उसको बहुत समझाने की कोशिश की है लेकिन वो समझ नहीं रहा है| प्रीता, प्रथ्वी से कहती है की मैं मानती हूँ हमारी शादी होने वाली थी लेकिन वो शादी भगवान को मंजूर नहीं थी| ये बात मैंने आपको समझाई थी तब आप समझ गए थे लेकिन आपका भाई समझने को तैयार नहीं है| वो कहता है की मेरी शादी आपसे से कराएगा| और पवन को समझाने को कहती है| 

प्रथ्वी, प्रीता से कहता है की जब आपकी करण से शादी हुई थी तब आपने समझाया था तब मैं समझ गया था ये आपकी गलत फहमी है| मैं तब से लेकर आज तक आपसे शादी करना चाहता हूँ| प्रीता कहती है मेरी शादी हो चुकी है| प्रथ्वी कहता है की बेमन से हुई शादी, शादी नहीं होती| आपकी शादी सिर्फ मुझसे होगी| प्रीता कमरे से जाने की कोशिश करती है तब प्रथ्वी कहता है आप केवल मेरे घर जाओगी| प्रीता इस बात से मना कर देती है और कहती है की मैं सिर्फ करण लूथरा के घर जाउंगी| 

कुंडली भाग्य के इस रोमंचित नाटक में, करण, प्रीता के साथ बिताये पलो को याद करता है| और उसे अचानक याद आता है की प्रीता ने अपने कपडे अलमारी में रखे थे जब उन कपड़ो को वहां पाता है और कहता है प्रीता के कपडे तो यहाँ पर है मतलब प्रीता कहीं नहीं गयी| और आगे अपने आप से कहता है की प्रीता अपने आप आ जाएँगी| मुहँ दिखाई की रस्म के बाद| वहीँ जानकी को याद आने लगता है की प्रथ्वी कहता है की वो शर्लिन से प्यार करता है प्रीता से नहीं|

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